आज भी मुझे याद है

अरुणिता
द्वारा -
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चाय की प्याली संग तेरा कमरे में आना,

 पायल की रुनझुन से मुझको जगाना |

आंख मिलते ही तेरा वो मुस्कुराना, 

आज भी मुझे याद है।

                                गेसूवों का झटकना ,

                                बूंदों को मुझ तक पहुंचाना,

                               सूरज की लाली सी बिंदी लगाना |

                               मुझे देखता देख, तेरा वो शर्माना

                               आज भी मुझे याद है।

दर्पण में खुद को देख, खुद पर रीझ जाना।

 बालों में उंगली फिरा, खुद में सिमट जाना ।

आहट मिलते ही तेरा कोने में छुप जाना ,

आज भी मुझे याद है।

                               बलखाती कटि नागिन सी चोटी लहराना,

                               मदिरमयी आंखों में , काजल लगाना।

                               देख लूं मैं सबसे पहले, तेरा वो कंगन खनकाना

                              आज भी मुझे याद है ।

भावशून्य हो ,खुद में खो जाना,

 होठों के बीच में ,उंगली दबाना ।

छूते ही तेरे तन-मन को ,छुई-मुई हो जाना ।

आंखों ही आंखों में, सब कुछ कह जाना।

 आज भी मुझे याद है।

 

-मधुलिका राय

गाजीपुर, उत्तर प्रदेश 

 


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