आकाश श्रीवास्तव तरुवर अवनी के अस्तित्व में आकर, जीवन-वायु उपहार दान कर, शपथ परोपकार का धर कर, स्थित हूँ अविचल मैं तरुवर। … द्वारा - अरुणिता मई 13, 2021