
कुमार पवन कुमार ‘पवन’
पानी
पानी किसी की नहीं सुनता वह किसी की व्यथा नहीं देखता वह सिर्फ बहता है बहते-बहते चला जाता है वहाँ तक जहाँ ह…
पानी किसी की नहीं सुनता वह किसी की व्यथा नहीं देखता वह सिर्फ बहता है बहते-बहते चला जाता है वहाँ तक जहाँ ह…
बीते हुए बचपन की गवाह हैं, मेरी गलियाँ अब भी लिखती हैं, वह मेरी सलामती की चिट्ठी देर रात बैठकर जब सो जाता…
किताबों के साथ-साथ पढ़ता हूँ , मैं वो तमाम चेहरे जो भीड़ में इस तरह खो गये जैसे खनकते हुए सिक्के! कुमार…
रो देती हैं जब औरतें पिघलकर बह जाता है सारा दुःख लावा की तरह धरती की गोद में बिलख पड़ता है बारिश के रूप मे…
कभी -कभी मैं बिल्कुल अकेला हो जाता हूँ पेड़ की उस डाल की तरह जिसके पत्ते अभी-अभी गुजर गये बिना किसी शोरगुल…
अब मैं इस बारिश को अच्छा कहूँ या बुरा ? कल रात इसने मिट्टी के कुछ खिलौनों को फिर मिट्टी में मिला दिया और …