
मृत्युंजय कुमार मनोज
सुकून
जिसकी तलाश में भाग रहा है हर शख्स सुबह, शाम चारों पहर, शिद्दत से लगा है कमाने में धन-दौलत,नाम-शोहरत, पर पाकर भी उसे नह…
जिसकी तलाश में भाग रहा है हर शख्स सुबह, शाम चारों पहर, शिद्दत से लगा है कमाने में धन-दौलत,नाम-शोहरत, पर पाकर भी उसे नह…
‘फिर से सूखी रोटी और आलू की सब्जी। पिछले तीन महीने से यही खाना खा-खाकर ऊब चुका हूं। मैं नहीं खाऊंगा’ -खाने की थाली को ग…
‘राजू…राजू… जरा गेहूं पीसवा कर लेते आना। और आते समय पापा के लिए ये दवाइयां भी लेते आना’ -श्यामा जी ने अपने ग्यारह वर्ष …