
विजय कनौजिया
साथ दे दो
वक्त की आंधियां आओ सह लें चलो लड़खड़ाते कदम फिर संभल जाएंगे आओ हम ही चलो आज झुक जाएंगे टूटते रिश्ते फिर से संभल…
वक्त की आंधियां आओ सह लें चलो लड़खड़ाते कदम फिर संभल जाएंगे आओ हम ही चलो आज झुक जाएंगे टूटते रिश्ते फिर से संभल…
क ख ग घ पुनः पढ़ा दो स्कूलों की सैर करा दो हंसते गाते पढ़ने जाएं पहली की कक्षा लगवा दो..।। छुपन-छुपाई फिर खेल…