
जाड़े की धूप
जी करता जाड़े की धूप, खीचूँ डोर लगाकर। पास बिठाऊँ दिनभर उसको, रक्खूँ उसे जगाकर।। बन्द करूँ बक्से में अपनें, फिर मैं उससे…
जी करता जाड़े की धूप, खीचूँ डोर लगाकर। पास बिठाऊँ दिनभर उसको, रक्खूँ उसे जगाकर।। बन्द करूँ बक्से में अपनें, फिर मैं उससे…
मन करता है कि फिर से लौट जाऊँ वहीं जहाँ से चली थी कुछ साल पहले जहाँ काकी,दादी,बुआ ममेरे,फुफुरे,चचेरे खेत,खलिहान,गाँव-गि…
जयति जयति जय माँ भारती। कोटि नमन शत बार आरती।। सूरज करता अभिनन्दन, नित्य लाल लगाकर चन्दन। हिमपर्वत हिमराज हिमालय, औषध…
पुरानें घर में भारत की, पूरी पहचान मिला करती थी। ओ से ओखली क से कलम, स्याही की दावात मिला करती थी।। संस्कार की पूरी…
हे ! मातृभूमि शत बार है तुमको नमन हर बार है। हम वीर सदा बलिदानीं हैं तुमसे पहचान हमारी है।। पीछे न …
हुआ सवेरा मुदित दिशाएँ अंधकार भागा धरती से। सूरज आया स्वर्ण किरण ले रोली तिलक लगा माथे से।। प्रकृति क…
उम्मीद !चिर काल से. सालों साल घिस रही है नारी न थकती है न हारती है न घबराती है बस निभाती है परम्पराओं को …